सुबह के आठ बज चुके है.हलकी धूंप निकली हुई है.आकाश में बादल बिखरे पड़े है.हाथ में अदरक वाली चाय का कप है.तीन हफ़्तों बाद खुद की बनाई हुई चाय पी रहा हूँ.जी हाँ! मैं पुणे आ गया हूँ.मैं घर आ गया हूँ.ऐसा लग रहा है मानो तीन हफ्ते नहीं, महीने गुज़र चुके है.सुकून है अब.
शुभ प्रभात..
श्री गुरुदेव दत्त....
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