Monday, September 19, 2016

हिमालय और मैं..

करीब २० वर्षों बाद फिर से हिमालय की गोद में आया हूँ.बचपन में परिवार सहित वैष्णो देवी और उत्तराखंड की यात्रा की थी.कुछ-कुछ यादें अब भी ज़हन में है.देहरादून से मसूरी जाते वक़्त रास्ते में एक नदी लगती है.शायद गंगा ही थी.तब आई, बाबा और आजी, तीनों नहाने चले गए.मुझे और मेरी बहन को बस में ही छोड़ गए थे.मुझे भी नहाना था.नदी के पानी में खेलना था, मस्ती करनी थी.लेकिन मैं ठहरा छोटा.लेकिन नदी में उतरने की धुन सवार थी.सो, बस का दरवाज़ा खोलने की कोशिश करने लगा.शरीर में जितनी भी ताक़त थी, लगा कर दरवाज़े को धक्का लगाया.एक ही धक्के में दरवाज़ा खुला और मैं बस के बाहर नीचे सड़क पर सर के बल गिर पड़ा.कुछ गुलांटियां खाते हुए नदी की मुंडेर से जा टकराया.मेरी बहन ज़ोर से चिल्लाई और आई,बाबा एवं आजी भागते हुए आये.शुक्र है उस मुंडेर का जो मुझे बचा लिया.फिर मैंने नदी में जाने का विचार छोड़ दिया.ख़ैर, हिमालय ने मुझे सबक़ सीखा दिया था.

मैं जहाँ भी रहा हूँ, पहाड़ मेरे आसपास ही रहे है.इंदौर, मेरा जन्मस्थान, वो भी विंध्याचल की पहाड़ियों से घिरा हुआ है.मणिपाल और पुणे, सह्याद्रि श्रृंखला से घिरा हुआ है.

मुझे पहाड़ों से प्यार है.और शायद, पहाड़ों को भी मुझसे.
इसलिए मुझे हमेशा अपनी गोद में बसाये रखते है.


श्री गुरुदेव दत्त....

Thursday, September 15, 2016

इंजीनियर्स डे..

आज सुबह से व्हाट्सएप्प और फेसबुक पर इंजीनियर्स डे के बधाई सन्देश देख रहा हूँ.सर विश्वेश्वरैया की याद में यह दिन मनाया जाता है.सभी इंजीनियर्स एक दूसरे को शुभकामनाएँ दे रहे है..लेकिन, मैं शायद इन शुभकामनाओं के लिए उचित पात्र नहीं हूँ.अब आप सोचेंगे कि ऐसा क्यों? जबकि, मैंने तो "इंजीनियरिंग" की है. जी हाँ, मैंने इंजीनियरिंग तो की है, लेकिन मैं इंजीनियर नहीं हूँ.मैं केवल एक इंजीनियरिंग ग्रैजुएट हूँ.मेरा कार्यक्षेत्र भी टेक्निकल नहीं है.मैंने ग्रैजुएट होने के बाद कोई ऐसा काम नहीं किया, जिससे मैं यह कह सकूँ कि, मैं इंजीनियर हूँ.इस बात का मुझे थोड़ा अफ़सोस है और शायद हमेशा रहेगा.अब आप सोच रहे होंगे कि मैं यह बात आज क्यों कर रहा हूँ? असल में होता यह है कि, इंसान अपनी कमियां हमेशा छुपाना चाहता है.इसलिए वो कोई ना कोई बहाना ढूंढता है.लेकिन, मेरी यह कमी मुझ पर बोझ लगने लगी थी.सो आज बोझ उतारने का अवसर मिल गया, इंजीनियर्स डे के बहाने.

ख़ैर सभी वास्तविक "इंजीनियर्स" को हार्दिक शुभकामनाएँ.
मैं ख़ुद के लिए किसी दिन "फ़र्ज़ी" इंजीनियर्स डे मना लूंगा.



श्री गुरुदेव दत्त....