आज सुबह से व्हाट्सएप्प और फेसबुक पर इंजीनियर्स डे के बधाई सन्देश देख रहा हूँ.सर विश्वेश्वरैया की याद में यह दिन मनाया जाता है.सभी इंजीनियर्स एक दूसरे को शुभकामनाएँ दे रहे है..लेकिन, मैं शायद इन शुभकामनाओं के लिए उचित पात्र नहीं हूँ.अब आप सोचेंगे कि ऐसा क्यों? जबकि, मैंने तो "इंजीनियरिंग" की है. जी हाँ, मैंने इंजीनियरिंग तो की है, लेकिन मैं इंजीनियर नहीं हूँ.मैं केवल एक इंजीनियरिंग ग्रैजुएट हूँ.मेरा कार्यक्षेत्र भी टेक्निकल नहीं है.मैंने ग्रैजुएट होने के बाद कोई ऐसा काम नहीं किया, जिससे मैं यह कह सकूँ कि, मैं इंजीनियर हूँ.इस बात का मुझे थोड़ा अफ़सोस है और शायद हमेशा रहेगा.अब आप सोच रहे होंगे कि मैं यह बात आज क्यों कर रहा हूँ? असल में होता यह है कि, इंसान अपनी कमियां हमेशा छुपाना चाहता है.इसलिए वो कोई ना कोई बहाना ढूंढता है.लेकिन, मेरी यह कमी मुझ पर बोझ लगने लगी थी.सो आज बोझ उतारने का अवसर मिल गया, इंजीनियर्स डे के बहाने.
ख़ैर सभी वास्तविक "इंजीनियर्स" को हार्दिक शुभकामनाएँ.
मैं ख़ुद के लिए किसी दिन "फ़र्ज़ी" इंजीनियर्स डे मना लूंगा.
श्री गुरुदेव दत्त....
ख़ैर सभी वास्तविक "इंजीनियर्स" को हार्दिक शुभकामनाएँ.
मैं ख़ुद के लिए किसी दिन "फ़र्ज़ी" इंजीनियर्स डे मना लूंगा.
श्री गुरुदेव दत्त....
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