Thursday, January 21, 2016

विचार।

विचारों का मेला है,
शब्दों का रेला है,
स्याह सी काली रात में,
अनदेखे सपनों का डेरा है,
आज तो नींद भी रूठी हुई है,
जाने आँखों से क्या खता हुई है,
कुछ देर में भोर हो जायेगी,
चिड़ियायें भी तब चहचहाएँगी,
मेरे विचारों, अब तो मैं आराम करूँ,
उन अनदेखे सपनों को अब सलाम दूँ।।

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