आज़ादी !
देश में हर तरफ आज़ादी की गूंज है.आज़ादी किसे पसंद नहीं.हर किसी को आज़ादी चाहिए.
मज़दूर को ठेकेदार से ,किसान को जमींदार से, गरीब वर्ग को गरीबी से, मध्यम वर्ग को साहूकार से, अमीर को नौकरी से.कुछ लोगों को समाज और धर्म से आज़ादी चाहिए.
इतना ही नहीं,कइयों को तो देश से ही आज़ादी चाहिए.ठीक है.मान लो मिल गयी आपको आज़ादी.अब क्या करोगे इस आज़ादी का?अपना पेट आज़ादी से भरोगे क्या?पेट भरने के लिए खाना चाहिए.और खाने के लिए पैसा.कहाँ से लाओगे पैसा? आज़ादी बेचकर? किसे बेचोगे? किसी और देश को?आज़ादी बेचने के लिए ही संघर्ष किया था क्या?
आप इस देश की प्रजा है.आपका कर्त्तव्य है देश की अखंडता और एकता की रक्षा करना.अगर आप इस कर्तव्यपरायणता को बंधन कहते है और इससे आज़ादी पाना चाहते है,तो निश्चित ही आप देश विरोधी है.
एक ऊँची डिग्री हासिल कर लेने या पचास किताबें पढ़ लेने से अगर आप ये समझते है कि आपको आज़ादी का अर्थ समझ आ गया है,तो आप गलत है.आज़ादी मांगने से पहले आज़ादी का अर्थ समझ लेना ज़रूरी है.
श्री गुरुदेव दत्त....
देश में हर तरफ आज़ादी की गूंज है.आज़ादी किसे पसंद नहीं.हर किसी को आज़ादी चाहिए.
मज़दूर को ठेकेदार से ,किसान को जमींदार से, गरीब वर्ग को गरीबी से, मध्यम वर्ग को साहूकार से, अमीर को नौकरी से.कुछ लोगों को समाज और धर्म से आज़ादी चाहिए.
इतना ही नहीं,कइयों को तो देश से ही आज़ादी चाहिए.ठीक है.मान लो मिल गयी आपको आज़ादी.अब क्या करोगे इस आज़ादी का?अपना पेट आज़ादी से भरोगे क्या?पेट भरने के लिए खाना चाहिए.और खाने के लिए पैसा.कहाँ से लाओगे पैसा? आज़ादी बेचकर? किसे बेचोगे? किसी और देश को?आज़ादी बेचने के लिए ही संघर्ष किया था क्या?
आप इस देश की प्रजा है.आपका कर्त्तव्य है देश की अखंडता और एकता की रक्षा करना.अगर आप इस कर्तव्यपरायणता को बंधन कहते है और इससे आज़ादी पाना चाहते है,तो निश्चित ही आप देश विरोधी है.
एक ऊँची डिग्री हासिल कर लेने या पचास किताबें पढ़ लेने से अगर आप ये समझते है कि आपको आज़ादी का अर्थ समझ आ गया है,तो आप गलत है.आज़ादी मांगने से पहले आज़ादी का अर्थ समझ लेना ज़रूरी है.
श्री गुरुदेव दत्त....
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