"शेठ की गाड़ी ड्राइवर का पसीना, सड़क पर चले बनके हसीना".
यह पंक्ति आज एक ट्रक के पीछे लिखी हुई देखी.आपने भी कई बार हाइवेज पर गाड़ियों के पीछे कुछ न कुछ लिखा हुआ देखा होगा.ये पंक्तियाँ हमें बरबस ही आकर्षित करती है.हाइवेज की भी एक अनोखी दुनिया है, जो हमें बहुत कुछ सिखा जाती है.कभी रफ़्तार के रूप में,तो कभी इन पंक्तियों के रूप में.आप इन पंक्तियों को ध्यान से पढ़ेंगे तो इनके पीछे की भावनाएं समझ आएँगी.इनको लिखने के पीछे किसी का शायराना अंदाज़ होता है तो किसी का आशिक़ मिज़ाज़.कोई अपना अनुभव बांटता है तो कोई कुछ सीख देता है.
कुल मिला कर हाइवेज पर दौड़ती गाड़ियों और उनके चालकों से बहुत कुछ सीख सकते है.
श्री गुरुदेव दत्त....
Nice and true one
ReplyDelete@ Rashmi Thank you :)
ReplyDelete