Friday, December 25, 2015

मेरे सपनों का घर।

कोंकण के किसी गाँव में एक छोटा सा घर बनाना चाहता हूँ, जिसमें कवेलू वाली छत हो.एक आँगन हो जो गाय के गोबर से लीपा हुआ हो.आँगन में तुलसी कुण्ड और एक नीम का पेड़ हो.कुछ ही दूर पहाड़ की तराई और बहती नदी हो.आसपास खेत खलिहान हो.बहती नदी के पानी की कल- कल करती आवाज़ सुनाई देती हो.बारिश के मौसम में बादलों से ढका आकाश और चारों ओर हरियाली की चादर फैली हो.बरामदे में बैठ चाय-पकौड़े का मज़ा हो.बस यही मेरी दुनिया हो....


श्री गुरुदेव दत्त....

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