Tuesday, December 8, 2015

ज्योतिष का बाज़ारीकरण.

कल की ही बात है.मेरे दोस्त की माँ को उनके ज्योतिषी ने बताया कि यदि इसकी(मेरे दोस्त की) शादी अप्रैल तक नहीं हुई तो उसके २-३ वर्ष बाद योग आएगा.फिर क्या?हड़बड़ी और गलतफमियों के बीच  माताजी ने लगे हाथ एक लड़की वालों को बुला लिया घर पर, जब कि वो लड़की मेरे दोस्त को पसंद नहीं थी.मजबूरन उसे उस लड़की से मिलना पड़ा.लेकिन बात नहीं बनी.और फिर कुछ समय के लिए माहौल तनावपूर्ण हो गया.

ये हालात मेरे दोस्त के घर के ही नहीं, बल्कि ऐसे बहुत से परिवारों के है जो "ज्योतिष" पर या "ज्योतिषियों" पर "अन्धविश्वास" रखते है.

ज्योतिष का मुझे बहुत ही अल्प है,लेकिन मैं मानता हूँ कि ज्योतिष एक "विज्ञानं" है जो भविष्य में होने वाली घटनाओं की कुछ हद तक गणना कर सकता है.कुछ अनुमान सही हो सकते है और कुछ गलत भी.इसलिए इस पर "अंध" विश्वास नहीं किया जा सकता.ज्योतिष आपका "मार्गदर्शन" तो कर सकता है, परन्तु एक निश्चित "समाधान" कुछ हद तक ही दे सकता है.

लेकिंन आज इस पुरातन विद्या का बाज़ारीकरण हो चुका है.हर गल्ली में आज आपको ज्योतिष की एक "दुकान" मिल जाएगी.टीवी पर रोज़ आपको नये नये उपाय बताते "दुकानदार" मिल जायेंगे.वो भी उन समस्याओं का उपाय जो "समस्या" है ही नहीं.पैसा कमाना ही इनका उद्देश्य है."मंगल और शनि " तो इनके "हथियार" है.अगर इंसान किसी भी तरह झांसे में न आये तो मंगल और शनि का डर दिखा दो.इससे भी काम न हो तो "पितृदोष" और "कालसर्प योग" बता दो.बस हो गया काम.

हालाँकि अभी भी कई ज्योतिषी ऐसे है जो निःस्वार्थ इस विद्या का उपयोग समाज की भलाई के लिये कर रहे है.लेकिन ज्योतिष के "दुकानदारों" के कारण लोग इन पर विश्वास करने से हिचकते है..इस विद्या का उपयोग समाज की भलाई की लिये हो, इसके लिये इसका बाज़ारीकरण रोकना होगा.एक डॉक्टर को प्रैक्टिस चालू करने से पहले "डिग्री" की आवश्यकता होती है.यही नियम "ज्योतिषी" पर भी लागू होना चाहिये,ताकि "ज्योतिष" और "ज्योतिषी" दोनों को "विश्वसनीय" बनाया जा सके.



श्री गुरुदेव दत्त....

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