Friday, December 4, 2015

असहिष्णुता आखिर है क्या?

आजकल "असहिष्णुता" पर कुछ लोगों द्वारा बड़े ही "बोल-बच्चन" दिए जा रहे है.ये ऐसे लोग है, जिन्हें शायद ही कभी किसी वस्तु की "कमी" हुई हो या कभी किसी बात का "वास्तविक" रूप से "विरोध" करना पड़ा हो.ऐसे लोगों को असहिष्णुता का केवल "शाब्दिक अर्थ" ही पता है.वास्तव में इन्होंने कभी असहिष्णुता का "अनुभव" किया ही नहीं. असहिष्णुता क्या होती है?ये समझने और जानने के लिए इन्हें भारत भ्रमण करना होगा.अरे पूरा देश ही छोड़ो, ये लोग जिस शहर या गाँव में रहते है, एक बार वही ठीक से देख लें.

एक बार ज़रा स्लम एरियाज में जाकर देखें.गरीबी और गन्दगी होने के बावजूद वहां लोग कितने सहिष्णु है.
एक बार उस औरत के घर जाकर देखें, जहाँ वो रोज़ दहेज़ की मांग से प्रताड़ित होकर भी सहिष्णु रहती है.
एक बार उस गरीब किसान की टूटी-फूटी झोपडी में जाकर देखें,जहाँ सूखे की मार से फसल ख़राब होने के कारण वो अपने परिवार को दो वक़्त की रोटी नहीं खिला पा रहा है.फिर भी वो सहिष्णु है.

ऐसे कितने ही लोग है देश में, जो कठिन परिस्थितियों में "सहिष्णुता" से रह रहे है.और कुछ लोग बोल रहे है कि देश में "असहिष्णुता" है.

रही बात धार्मिक "असहिष्णुता" की, तो दिवाली,होली,रमज़ान,क्रिसमस,गुरुनानक जयंती आदि त्यौहारों पर देश के लोगों का "भाई-चारा" साबित कर देता है कि हमारा देश "कल" भी "सहिष्णु" था, आज भी है और हमेशा रहेगा.

श्री गुरुदेव दत्त....

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