वक़्त के गलियारे से होते हुए "वर्ष २०१५" भी गुज़र गया.अब सामने आ चुका "वर्ष २०१६" का बरामदा दिख रहा है.गलियारे से गुज़रते हुए इस वर्ष को कभी अंधियारे मिले,तो कभी रौशनी भी मिली.कुछ दुःख मिले तो कुछ खुशियां भी मिली.कभी पत्थरों की ठोकरें मिली तो कभी मुलायम गलीचा भी मिला.कुछ नया पाया और कुछ पुराना खोया.अपनी मुश्किलों में उलझ कर जाने - अनजाने ही कितनों का दिल दुखाया.इसके लिए मेरी ओर से क्षमा की याचना.कई सारी गलतियां की.मेरी गलतियों को क्षमा करने के लिए ज्ञात-अज्ञात सभी लोगों को धन्यवाद.गलियारे के आखिरी छोर पर खड़े होकर, जब मै पीछे मुड़कर देखता हूँ, तो आँखों से पानी की बूँदें टपक पड़ती है.कुछ "बूदें" ख़ुशी की, तो कुछ गम की.ये बूँदें ही मेरा "अनुभव" है जो इस वर्ष ने मुझे दिया है.इन्हीं "बूंदों" को हथेली की कटोरी में समेट कर चलते जाना है,क्यूंकि यही ज़िन्दगी है.
अब वक़्त आ चुका है वर्ष २०१६ के स्वागत का.
इसलिए अलविदा वर्ष २०१५.
नए वर्ष की सभी को शुभकामनाएं.
श्री गुरुदेव दत्त....
अब वक़्त आ चुका है वर्ष २०१६ के स्वागत का.
इसलिए अलविदा वर्ष २०१५.
नए वर्ष की सभी को शुभकामनाएं.
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